Chhatarpur News: काम-धंधे के लिए किसानी छोड़कर भटकर रहे लाखों लोगों के लिए छतरपुर के एक युवा की कहानी प्रेरणा बन सकती है. इस शख्स ने पढ़ाई तो 12वीं तक ही की है, लेकिन बीते 3 साल उनका बिजनेस तेजी से बढ़ रहा है. लाखों का मुनाफा हो रहा है. दरअसल, बक्सवाहा तहसील के एक छोटे से गांव के श्रीराम लोधी खेती करते हैं. उनके खेतों में एक बेहद सामान्य फसल अलसी की खेती होती है. अमूनन इस फसल की कीमत बहुत कम होती है, लेकिन श्रीराम इसे बढ़िया दाम में बेच रहे हैं.
श्री राम बताते हैं कि वह हर साल कुछ बीघा में 10 से 50 किलो अलसी बो देते हैं. इसमें 5 से 10 क्विंटल अलसी का उत्पादन हो जाता है. अगर इसे सीधे मंडी में बेचेंगे तो 70 से 80 रुपए किलो ही बिकेगी. लेकिन, इसे रोस्टेड कर बेचते हैं. जिससे अलसी का भाव 400 रुपए किलो हो जाता है. अलसी की खेती पहले बाबा करते थे, लेकिन धीरे-धीरे आवारा जानवरों की समस्या के चलते लोगों ने इस खेती में रुचि लेना कम कर दिया है. मैंने भी बचपन से अलसी खेती के बारे में सुन रखा था.
ऐसे करते हैं पैकेजिंग
ऑनलाइन सर्च किया तो पता चला इसकी तो मेडिकल फील्ड में बहुत डिमांड है. इस खेती को करने में मेरी रुचि बढ़ती गई और आखिरकार मैंने तय कर लिया कि अलसी का ही सबसे बढ़िया बिजनेस रहेगा. श्री राम बताते हैं कि वह हर साल 10 क्विंटल अलसी का उत्पादन करते हैं. अलसी को रोस्टेड करते हैं. काला नमक, मुलेठी का रस जैसी तमाम तरह की चीजें मिलाते हैं. इसके बाद इसकी पैकेजिंग कर मार्केट में ब्रांड बनाकर बेचते हैं. रोस्टेड अलसी सीड की पैकेजिंग करते हैं, जिसमें आधा किलो से लेकर 1 किलो का पैकेट रहता है. बीपी, शुगर और कमर दर्द के मरीज के अलावा अन्य लोग भी इसे खरीदते हैं.
दो लाख का मुनाफा
श्रीराम बताते हैं कि हमारे यहां रोस्टेड अलसी का आधा किलो का पैकेट 200 रुपए में मिलता है. वहीं 1 किलो का पैकेट 400 रुपए किलो बेचते हैं. हमें इस बिजनेस में लागत का डबल रेट मिल जाता है. खेती में लागत तो 10 हजार रुपए ही आती है. रोस्टेड अलसी बनाने में लागत आती है. हर साल 10 क्विंटल रोस्टेड अलसी बेच लेते हैं. भले ही फुटकर बेचते हैं, लेकिन सालभर में 4 लाख की अलसी बेच लेते हैं. इसमें से शुद्ध मुनाफा घर बैठे 2 लाख रुपए का हो जाता है.
अलसी के अलावा ये भी बेचते हैं
22 वर्षीय श्रीराम लोधी बताते हैं कि कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई की है. इसके बाद चाचा के साथ जुड़ गया. हमारे चाचा 20 साल से खाने-पीने की बहुत सी चीजें बनाते हैं. उन्होंने बताया कि तुम अलसी सीड के साथ दूसरे फूड प्रोडक्ट भी बेच सकते हो. अलसी के साथ धीरे-धीरे दूसरे प्रोडक्ट भी तैयार करके मार्केट में बेचने लगा. श्री राम बताते हैं कि पापड़, बरी, आंवला और अलसी के साथ ही ज्वार, बाजरा, फीका गेहूं, मीठा गेहूं, पहाड़ी अदरक, लाई का मिक्स वेज, उड़द दाल और मूंग दाल की बरी, साथ ही रोस्टेड अलसी भी बनाते हैं.
इतनी तरह की नमकीन
श्रीराम बताते हैं कि मोटे अनाज से नमकीन बनाते हैं. जैसे बाजरा और ज्वार की नमकीन बनाते हैं. हमारे यहां मीठा गेहूं और फीका गेहूं भी बनता है. मीठा गेहूं जिसे पहले फुलाया जाता है और फिर मिट्टी बर्तन में भुनाया जाता है. इसी तरह रोस्टेड फीका गेहूं भी बनाते हैं. बिजोरा नमकीन भी बनाते हैं जिसे तिल, कद्दू और उड़द दाल से बनाया जाता है, इसे तल कर खाते हैं.
घर में मिला रोजगार
श्रीराम बताते हैं कि हमारे यहां के युवा बाहर कमाने के लिए जाते हैं, लेकिन मुझे घर में ही रोजगार मिल गया. पहले तो मुझे भी नहीं इतनी सारी चीजें बनाना आती थीं. लेकिन धीरे-धीरे मैं भी बनाना सीख गया.