छतरपुर में स्थानीय न्यायालय ने 17 साल पुराने मारपीट और रंगदारी के एक मामले में आरोपी सदाफल को दोषी ठहराया है। अदालत ने सदाफल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 329 के तहत 5 साल के सश्रम कारावास और 500 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जिला लोक अभियोजन अधिकारी (डीपीओ) प्रवेश अहिवार ने बताया कि यह घटना 13 अगस्त 2009 की शाम करीब 7 बजे की है। पीड़ित पैश्वनीदीन, जो उस समय बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के रूप में कार्यरत थे, बदोराकला के मुख्य मार्ग स्थित हाई स्कूल के सामने से गुजर रहे थे। तभी आरोपियों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और जातिसूचक व अभद्र गालियां दीं। फावड़े और लाठियों से किया था हमला आरोपियों ने पैश्वनीदीन पर वोटर लिस्ट में उनके नाम न जोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने शराब और मुर्गे के लिए 1000 रुपए की मांग की। जब पीड़ित ने पैसे देने से इनकार किया, तो आरोपी स्वामीदीन ने लोहे के फावड़े से और सदाफल, भुक्कड़ व हल्काईयां ने लाठियों से उन पर हमला कर दिया। इस हमले में पैश्वनीदीन को सिर, पीठ, कंधे और जांघ पर गंभीर चोटें आईं। बीच-बचाव करने आए गवाहों को भी आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी थी। पुलिस ने इस मामले में धारा 341, 294, 323, 324, 327, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज किया था। विचारण के दौरान आरोपी सदाफल ने खुद को निर्दोष बताया और दावा किया कि उसे रंजिश के चलते फंसाया गया है। हालांकि, न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर उसे दोषी पाया और सजा सुनाई।
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