गर्मी से झुलस रहे इंदौर में एक ओर जहां बोरिंग दम तोड़ रहे, जल स्तर नीचे जा रहा, वहीं नगर निगम की टैंकर से जल वितरण में विसंगति ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। निगम ने टैंकरों का बंटवारा कुछ इस तरह से किया है कि जिन वार्डों में नर्मदा लाइन नहीं है, वहां टैंकर कम हैं तो जहां पहले से नर्मदा लाइनें हैं, वहां तीन गुना टैंकरों से सप्लाय हो रही है। कहने को वार्डों में 500 टैंकर दौड़ रहे, लेकिन किसी वार्ड में 5 तो कहीं 15 टैंकरों से सप्लाय है। विधानसभावार देखें तो 2 नंबर में नर्मदा और बोरिंग होने के बावजूद टैंकरों की संख्या ज्यादा है। खजराना, निपानिया, लिंबोदी और मध्य क्षेत्रों के वार्डों में टैंकर सीमित संख्या में हैं। कई वार्ड ऐसे हैं, जहां नर्मदा की लाइनें हैं, लेकिन टैंकरों की संख्या दो अंकों में है या अलग-अलग है। टैंकर वितरण में असमानता ऐसी और लोगों का ऐसा संघर्ष… 90 हजार रुपए महीने का पानी खरीदकर पी रहे 1. स्नेहलतागंज में विशाल पैलेस में 28 परिवार रहते हैं। यहां मार्च से ही पानी के टैंकरों की जरूरत है। लोगों को रोजाना 15 हजार लीटर क्षमता के दो टैंकर बुलवाना पड़ रहे हैं, जिसके लिए 3200 रुपए प्रतिदिन का भुगतान किया जा रहा है। यानी एक महीने में 90 हजार रुपए से ज्यादा का पानी खरीदकर पी रहे। 2. अनुराग नगर में पानी कम दबाव से आ रहा है। वार्ड 37 में 55 फीसदी हिस्से में नर्मदा नहीं है। यहां बोरिंग से काम चल जाता था, लेकिन अब जल स्तर नीचे जाने से टैंकर की जरूरत पड़ने लगी है। 6 हजार लीटर का टैंकर 500 में मिल जाता था। अब लोगों को 800 से एक हजार रुपए तक एक टैंकर के देना पड़ रहे हैं। 3. वार्ड 77 के अनुराधा नगर में भी बोरिंग से पानी मिलने की मात्रा कम हुई है। बायपास से सटी अन्य टाउनशिप में भी यही स्थिति है। रहवासी ने बताया बोरिंग से पानी नहीं आ रहा है। नर्मदा लाइन से भी पानी नहीं मिला। 15 दिन से परेशान हैं। बिचौली क्षेत्र की मानसरोवर, श्रीजी वैली में फरवरी से समस्या है। जलस्तर 40 से 75 फीट तक पहुंचा
नवंबर के बाद 60 फीसदी शहर क्रिटिकल जोन में चला जाता है। जलस्तर 35 फीट से नीचे चला जाता है। 30 से 35 फीट तक जलस्तर रहने तक बोरिंग से पानी मिलने की संभावना बनी रहती है। जोन से रिपोर्ट मिलती है। इसके बाद टैंकर जारी किए जाते हैं। कुछ इलाकों में नर्मदा लाइन का काम चलता है तो वहां वैकल्पिक रूप से कुछ दिन के लिए अधिक टैंकर देते हैं। पिछले साल की तरह ही वार्डों को टैंकर दिए हैं। – आशीष पाठक, अपर आयुक्त, निगम
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