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Chris Lewisछ इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज ऑलराउंडर क्रिस लुईस को कभी अगला इयान बॉथम कहा जाता था, लेकिन उनकी तंगहाली ने उन्हें आगे चलकर ड्रग स्मगलर बना दिया. इसके कारण न सिर्फ क्रिस का करियर बर्बाद हुआ बल्कि उन्हें 13 साल की जेल भी हुई. हालांकि, उन्हें आधी सजा काटने के बाद रिहा कर दिया गया था. आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी.
इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर क्रिस लुईस
नई दिल्ली: लंबी कदकाठी और गठीला बदन वाला एक तेज गेंदबाज की साल 1990 में इंग्लैंड क्रिकेट टीम में एंट्री होती है. देखते ही देखते उस खिलाड़ी की तुलना इंग्लैंड महान इयान बॉथम से की जाने लगी. अपनी रफ्तार और गेंद की धार से वह जल्द ही बल्लेबाजों के लिए दहशत का दूसरा नाम बन गए, लेकिन किसे पता था कि सफलता की चकाचौंध में वह खिलाड़ी इस कदर रास्ता भटेगा कि वह अपना करियर तबाह कर लेगा. यह कहानी है क्रिस लुईस की जो क्रिकेट के मैदान की चकाचौंध से शुरू होकर जेल की सलाखों के पीछे के अंधेरे तक जाती है. एक बेहद प्रतिभाशाली ऑलराउंडर से एक सजायाफ्ता ड्रग स्मगलर बनने तक का उनका सफर खेल जगत की सबसे दुखद घटनाओं में से एक माना जाता है.
क्रिस लुईस का क्रिकेटिंग करियर
गुयाना में जन्मे क्रिस लुईस ने इंग्लैंड के लिए अपना डेब्यू 1990 में किया था. वे एक ऐसे खिलाड़ी थे जिनमें गेंद को स्विंग कराने की अद्भुत क्षमता थी और वे निचले क्रम में आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे. वह इंग्लैंड के लिए 32 टेस्ट और 53 वनडे मैच खेले. टेस्ट करियर में उन्होंने 93 विकेट लिए और 1175 रन बनाए, जिसमें 1991 में श्रीलंका के खिलाफ लगाया गया एक शानदार शतक भी शामिल था.
इयान बॉथम से क्यों हुई थी क्रिस की तुलना
बता दें कि क्रिस लुईस को अक्सर अगला इयान बॉथम कहा जाता था. हालांकि, अनुशासन की कमी और चोटों के कारण वे अपनी प्रतिभा के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर पाए. 1999 में उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच खेला. ऐसे में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद लुईस की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी. उन्होंने कई बिजनेस करने की कोशिश की लेकिन असफल रहे. 2008 तक आते-आते वे गहरे आर्थिक संकट में फंस चुके थे. इसी दौरान पैसे के लालच में उन्होंने एक आत्मघाती कदम उठाया.
दिसंबर 2008 में लुईस सेंट लूसिया से लंदन के गैटविक हवाई अड्डे पर लौटे. कस्टम अधिकारियों को उनके सामान पर संदेह हुआ. जब उनके क्रिकेट बैग की तलाशी ली गई तो उसमें फलों के रस के डिब्बों में छिपाई गई तरल कोकीन मिली. इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 140000 पाउंड थी.
क्रिस को हुई 13 साल की सजा
ड्रग तस्करी में पकड़े जाने के बाद क्रिस लुईस को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया. मुकदमे के दौरान उन्होंने दावा किया कि उन्हें नहीं पता था कि डिब्बों में ड्रग्स है, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलें खारिज कर दीं. इसके बाद मई 2009 में उन्हें नशीले पदार्थों की तस्करी का दोषी पाया गया और 13 साल की जेल की सजा सुनाई गई. जेल में बिताए गए समय ने लुईस के सोचने का नजरिया बदल दिया. अपनी सजा का आधा हिस्सा काटने के बाद उन्हें 2015 में रिहा कर दिया गया.
जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अपनी गलतियों को स्वीकार किया और एक बदला हुआ इंसान बनने की कोशिश की. आज क्रिस लुईस युवा क्रिकेटरों और युवाओं के बीच जाकर अपने अनुभवों को साझा करते हैं. वे उन्हें बताते हैं कि कैसे एक गलत फैसला पूरे करियर और जीवन को बर्बाद कर सकता है.
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जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. इस वक्त नेटवर्क 18 समूह में हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, ह…और पढ़ें