बुरहानपुर की चमत्कारी दरगाह, यहां पूरी होती है संतान प्राप्ति की मान्यता!

बुरहानपुर की चमत्कारी दरगाह, यहां पूरी होती है संतान प्राप्ति की मान्यता!


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बुरहानपुर जिले के पत्थर पीर बाबा की दरगाह है. हिंदू भाई इसे गोटिया पीर बाबा की दरगाह कहते हैं. यहां पर सभी धर्म के लोग आते हैं और सबसे अधिक संतान की मन्नत मांगी जाती है. मान्यता है कि यहां पर प्रार्थना करने से व्यापार और हाथ पैर दर्द और खुजली की समस्या भी दूर होती है.

बुरहानपुर. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में आज भी कहीं प्राचीन मंदिर मस्जिद और दरगाह मौजूद थे जिनकी अपनी-अपनी कहानी है. आज हम आपको मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के पत्थर पीर बाबा की दरगाह की कहानी से रूबरू करा रहे हैं. यहां पर दो पत्थर रखे हुए हैं सबसे अधिक लोग यहां पर संतान, व्यापार, खुजली की समस्या से निजात पाने के लिए पहुंचते हैं और यहां पर जो भी भक्त जियारत करने के लिए पहुंचता है उसकी मन्नत पूरी होती है.

यहां जैसे ही लोग मन्नत मांगते हैं और वह पत्थरों पर हाथ रखते हैं और मन्नत पूरी होने वाली होती है तो यह पत्थर घूमना शुरू कर देते हैं. मुजावर सैयद मोइनुद्दीन आठ पीढ़ी से सेवा कर रहे हैं यहां पर मन्नत पूरी होने पर पेड़े गुलाब जामुन सीरनी और चादर चढ़ाई जाती है. पत्थर पीर बाबा की दरगाह 100 साल पुरानी बताई जाती है यहां पर देश विदेश से भी लोग आते हैं.

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व्यापार और रोग संबंधी समाधान

लोकल 18 की टीम को मुजावर सैयद मोइनुद्दीन ने जानकारी देते हुए बताया कि मेरा परिवार आठ पीढ़ियों से यहां पर सेवा कर रहा है. इस दरगाह को पत्थर पीर बाबा की दरगाह कहा जाता है. हिंदू भाई गोटिया पीर बाबा की दरगाह कहते हैं. यहां पर सभी धर्म के लोग आते हैं और सबसे अधिक संतान की मन्नत मांगी जाती है. व्यापार की और हाथ पैर दर्द और खुजली की समस्या भी दूर होती है. यहां पर दूर-दूर से लोग जियारत करने के लिए पहुंचते हैं. यहां पर सात गुरुवार जियारत करने से मन्नतें पूरी होती है. मन्नत पूरी होने पर सिरनी फूल चादर पेड़े जलेबी और गुड़ का प्रसाद चढ़ाया जाता है.

विदेशों से भी आते हैं पर्यटक
इस दरगाह पर जियारत करने के लिए विदेश से भी पर्यटक आते हैं. उनके द्वारा विदेश की करेंसी यहां पर दरगाह के काम के लिए भी भेजी जाती है. मुजावर यह भी बताते हैं कि यहां से कई लोगों को फर्क पड़ा है जो आज भी यहां पर जियारत करने के लिए दुआ करने के लिए आते हैं. यहां पर हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सभी समुदाय के लोग शामिल होते हैं और दुआ करते हैं.

नोट– ये जानकारी दरगाह पर आइये श्रद्धलियों और दरगाह प्रबंधक के लोगों से ली गई है. ऐसी किसी मान्यता की न्यूज 18 पुष्टि नहीं करता है.

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Mohd Majid

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