रतलाम सीवरेज घोटाला: 141 करोड़ डकार लिए, काम हुआ सिर्फ आधा; EOW भोपाल तक पहुंची फाइल

रतलाम सीवरेज घोटाला: 141 करोड़ डकार लिए, काम हुआ सिर्फ आधा; EOW भोपाल तक पहुंची फाइल


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Ratlam Sewerage Scam: रतलाम में सीवरेज प्रोजेक्ट के नाम पर करोड़ों के भ्रष्टाचार का मामला गरमा गया है. व्हिसलब्लोअर पारस सकलेचा ने ईओडब्ल्यू (EOW) भोपाल में बयान दर्ज कराए हैं. आरोप है कि 71 हजार घरों को जोड़ने के नाम पर 141 करोड़ का पूरा भुगतान लिया गया, लेकिन काम केवल आधे घरों में हुआ. जानें…

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रतलाम सीवरेज घोटाला

Ratlam News: रतलाम का बहुचर्चित सीवरेज घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है. व्हिसलब्लोअर पारस सकलेचा ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) भोपाल में अपने बयान दर्ज कराए हैं. इस प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार की परतें अब खुलने लगी हैं, जो चौकाने वाली भी हैं. आरोप है कि शहर के करीब 50 हजार मकानों को सीवरेज से जोड़ा जाना था. लेकिन हकीकत में महज 36 हजार मकान ही जोड़े गए. काम आधा हुआ, लेकिन भुगतान 141 करोड़ रुपए का पूरा ले लिया गया.

आंकड़ों की बाजीगरी
पारस सकलेचा के अनुसार, शुरुआत में 53,273 घरों का लक्ष्य रखा गया था. इनमें से सिर्फ 27,103 घरों को जोड़ा गया और 117 करोड़ रुपए निकाल लिए गए. इसके बाद 13 हजार अतिरिक्त घरों के लिए 26 करोड़ रुपए और स्वीकृत कराए गए. लेकिन, यहां भी खेल हुआ और सिर्फ 8,000 मकान ही जोड़े गए.

हर कदम पर हेराफेरी
याचिकाकर्ता पारस सकलेचा केअनुसार, प्रोजेक्ट की तकनीकी रिपोर्ट भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रही है:

पाइपलाइन: 452 किमी बिछानी थी, लेकिन डाली गई सिर्फ 268 किमी.
पाइप पेमेंट: 38 करोड़ की जगह 51 करोड़ रुपए का भुगतान लिया गया.
मैनहोल: 6,025 की जगह 8,435 बना दिए गए, ताकि बजट खपाया जा सके.
STP प्लांट: योजना में 6 प्लांट बनने थे, लेकिन बनाए गए सिर्फ 2.

देरी और जनता की परेशानी
यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2017 में शुरू हुआ था. इसे दिसंबर 2019 में पूरा होना था. लेकिन यह काम जून 2024 में जाकर खत्म हुआ. पांच साल की देरी के बावजूद शहर के 21 हजार घर इस सुविधा से वंचित हैं. इन घरों की गंदगी आज भी सड़कों पर बह रही है, जिससे पूरी योजना का मकसद ही खत्म हो गया है.

बड़ा सिंडिकेट शामिल
पारस सकलेचा ने गंभीर आरोप लगाए हैं. उनके अनुसार इस खेल में रतलाम नगर निगम के अधिकारी, भोपाल की स्टेट लेवल टेक्निकल कमेटी, केंद्र सरकार की एजेंसी और कंसलटेंट सभी शामिल हैं. सबकी मिलीभगत से करोड़ों रुपए के बंदरबांट को अंजाम दिया गया. अब सवाल यह है कि जब मकान कम जुड़े, तो लागत कम क्यों नहीं हुई.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें



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