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Jabalpur High Court: जबलपुर हाईकोर्ट ने हिजबुल आतंकी संगठन के 3 संदिग्ध आतंकियों को जमानत दे दी है. हाईकोर्ट ने माना है कि सेमिनार में भागीदारी या इस्लामिक साहित्य की फोटोकॉपी मिलने से किसी को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल नहीं माना जा सकता. इसी वजह से तीन को बेल दी गई है.
जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (AI तस्वीर)
Jabalpur Hight Court: NIA और ATS ने हिजबुल तहरीर आतंकी संगठन के पूरे देश से कुल 17 संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था. इनमें से अब तीन को जबलपुर हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है और उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है. जिन तीन संदिग्ध को बेल मिली है. उनमें मोहम्मद जुनैद, मोहम्मद वसीम और मोहम्मद करीम के नाम शामिल हैं. बाकी आरोपियों पर अभी जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है.
जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया कि केवल ‘माइंडसेट’, सेमिनार में भागीदारी या इस्लामिक साहित्य की फोटोकॉपी मिलने से किसी को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल नहीं माना जा सकता. NIA कोर्ट में ऐसा कोई सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो कि वह आतंकी गतिविधियों में शामिल थे. कोर्ट ने माना कि ट्रॉयल लंबा चलेगा और इतने समय तक उन्हें जेल में नहीं रखा जा सकता है.
NIA ने जब इन संदिग्ध को गिरफ्तार किया था, तो उनके पास से संदिग्ध आतंकी दस्तावेज और इस्लामिक साहित्य मिला था, जो कट्टर मानसिकता को दर्शाता था. उनके फोन भी जब्त किए थे. उन पर UAPA लगाया गया था.
UAPA भारत का मुख्य आतंकवाद विरोधी कानून है, जो राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों, आतंकवाद, या गैर-कानूनी संघों से निपटने के लिए लगाया जाता है. कानून व्यक्तियों या संगठनों के आधार पर लगाया जा सकता है. इसके तहत आरोपी को बिना चार्जशीट के 180 दिनों तक जेल में रखा जा सकता है.
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गोविन्द सिंह जनवरी 2026 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर Senior Sub Editor कार्यरत हैं, जहां वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ स्टेट टीम का हिस्सा हैं. किस्सागोई के अंदाज में खबरें पेश कर…और पढ़ें