मुरलीधरन ने स्पिनरों के अस्तित्व पर उठाए सवाल, बताया क्यों होती है पिटाई

मुरलीधरन ने स्पिनरों के अस्तित्व पर उठाए सवाल, बताया क्यों होती है पिटाई


होमखेलक्रिकेट

मुरलीधरन ने स्पिनरों के अस्तित्व पर उठाए सवाल, बताया क्यों होती है पिटाई

Last Updated:

Muttiah Muralitharan statement: श्रीलंका के महान क्रिकेटर मुथैया मुलरीधरन ने मौजूदा समय के स्पिन गेंदबाजों के अस्तित्व पर सवाल उठाए हैं. मुरलीधरन का मानना है कि आज के स्पिन गेंदबाज गेंद को टर्न नहीं करा पाते हैं. गेंदबाजों को कम उम्र में गेंद घुमाने की कला को सीखनी चाहिए. आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में कोई गेंदबाज गेंद को टर्न नहीं करा पाएंगे.

Zoom

मुथैया मुरलीधरन ने स्पिन गेंदबाजों का दिया टिप्स

नई दिल्ली: श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन का मानना ​​है कि इंडियन प्रीमियर लीग में स्पिन गेंदबाज गेंद को टर्न कराने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने कम उम्र से ही यह हुनर ​​नहीं सीखा है और टूर्नामेंट के दौरान इस कला को सीखना मुमकिन नहीं है. मुरलीधरन ने कहा कि आजकल स्पिन गेंदबाज गेंद को टर्न कराने और बल्लेबाजों को सोचने पर मजबूर करने की कला नहीं सीखते क्योंकि उनका ध्यान सिर्फ विविधता के जरिए रन रोकने पर रहता है.

मुंबई इंडियन्स के खिलाफ बुधवार को सनराइजर्स हैदराबाद की छह विकेट की जीत के बाद मुरलीधरन ने कहा, ‘‘घरेलू क्रिकेट में भी स्पिन गेंदबाजों के लिए हालात ऐसे ही रहे हैं. जब हम क्रिकेट खेलते थे तो एक स्पिनर के तौर पर आपको गेंद को टर्न कराना होता था, यही आपका पहला मकसद होता था. आजकल यह मुख्य बात नहीं रही क्योंकि हर कोई टेस्ट क्रिकेट खेलने के बारे में नहीं सोच रहा है. वे वनडे क्रिकेट खेलने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘कम उम्र में भी वे सिर्फ तेज गेंदबाजी करने और गेंद में विविधता लाने की कोशिश करते हैं, उसे टर्न कराने की नहीं. क्योंकि उन्हें कम उम्र में यह काबिलियत नहीं मिली होती इसलिए वे 18 या 19 साल की उम्र में आकर गेंद को टर्न कराने की कोशिश नहीं कर सकते क्योंकि उनकी ‘मसल मेमोरी’ (शारीरिक आदतें) पहले से ही वैसी बन चुकी होती हैं.’’ मुरलीधरन ने कहा, ‘‘जब आप 10, 11 या 12 साल के होते हैं तब गेंद को टर्न कराने की कोशिश करें. हमने इसी तरह सीखा था. बल्लेबाज को छकाने के लिए हमें गेंद को टर्न कराना जरूरी होता है.’’

मुरलीधरन ने कहा कि आईपीएल में स्पिनरों के खिलाफ बल्लेबाजी करना ‘थ्रो-डाउन विशेषज्ञों’ के खिलाफ अभ्यास करने जैसा है क्योंकि इसमें बस गेंद की लाइन में आकर उसे जोर से मारना होता है. जब उनसे पूछा गया कि वह और ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज शेन वॉर्न बल्लेबाजों के अनुकूल हालात में कैसे खेलते तो मुरलीधरन ने कहा कि वे इतने महंगे साबित नहीं होते.

मुरलीधरन ने कहा, ‘‘देखिए हम गेंद को टर्न तो जरूर कराते लेकिन हम कोई बड़ा असर नहीं डाल पाते. शायद हम एक या दो विकेट ही ले पाते. वे (फिर भी) हमारे खिलाफ आसानी से 40 रन बना लेते क्योंकि विकेट इतने अच्छे होते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘शेन वॉर्न भी एक कमाल के खिलाड़ी थे क्योंकि वह गेंद को घुमा सकते थे और चमत्कार कर सकते थे. (लेकिन) खेल अब बदल गया है. हम अलग-अलग दौर की तुलना नहीं कर सकते. जिस तरह से खिलाड़ी बल्लेबाजी करते हैं, खिलाड़ियों की मानसिकता… ये वो चीजें हैं जो बदल गई हैं.’’

इस पूर्व दिग्गज स्पिनर ने कहा, ‘‘हम अतीत के बारे में नहीं सोच सकते. ठीक है हम अपने समय के महान खिलाड़ी थे लेकिन अब ये लोग महान हैं क्योंकि खेल इसी दिशा में आगे बढ़ा है.’’ मुरलीधरन ने कहा कि बल्ले और गेंद के बीच मुकाबले में संतुलन बनाने का एकमात्र तरीका निष्पक्ष विकेट (जिनसे बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को समान मदद मिले) तैयार करना है.

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम निष्पक्ष विकेट दे सकें, लेकिन फिर दर्शक ऊबने लगेंगे. क्रिकेट प्रेमी और बहुत कम उम्र के क्रिकेटर, टी20 के चाहने वाले बहुत अधिक मनोरंजन चाहते हैं. वे चौके और छक्के देखना चाहते हैं इसलिए इस टूर्नामेंट को इसी तरह से तैयार किया गया है और एक अतिरिक्त खिलाड़ी को बल्लेबाजी के लिए उतारा जाता है जिससे कि टीम को कम स्कोर पर आउट होने से बचाया जा सके.’’ मुरलीधरन ने कहा, ‘‘यह एक मनोरंजन है. इसमें यह नहीं देखा जाता कि आप किसी क्रिकेटर को विकसित कर रहे हैं या नहीं. इस समय यह एक बहुत बड़ा व्यवसाय है, है ना? प्रायोजक और बाकी सब कुछ’’

About the Author

Jitendra Kumar

जितेंद्र कुमार डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में बीते 10 सालों से सक्रिय हैं. इस वक्त नेटवर्क 18 समूह में हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. क्रिकेट के साथ बॉक्सिंग, कबड्डी, बैडमिंटन, ह…और पढ़ें



Source link