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Shikhar Dhawan on Vaibhav Suryavanshi: शिखर धवन ने उभरते हुए युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ की है. धवन का मानना है कि शीर्ष स्तर पर प्रदर्शन को उम्र से अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जिस तरह से वैभव ने बुमराह और अर्शदीप जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाजों के खिलाफ निडर होकर बड़े शॉट खेले हैं, वह अविश्वसनीय है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि स्थापित टॉप ऑर्डर में जगह बनाना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन वैभव को धैर्य रखना चाहिए. उनका समय निश्चित रूप से आएगा.
वैभव सूर्यवंशी के टैलेंट को देखकर धवन ने कही ये बात.
नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर अक्सर हम उम्र को अनुभव का पर्याय मान लेते हैं, लेकिन शिखर धवन का नजरिया इससे अलग और प्रगतिशील है. वर्षों तक अपनी बल्लेबाजी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले धवन अब नई प्रतिभाओं को परखने और उन्हें सही दिशा देने में विश्वास रखते हैं. हाल में उन्होंने जिस तरह से युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी का समर्थन किया. वह न केवल एक बड़े खिलाड़ी की परिपक्वता को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी है. वैभव इस समय आईपीएल में धमाल मचा रहे हैं. वह 9 मैचों में 400 रन बना चुके हैं. ऑरेंज कैप की दौड़ में सूर्यवंशी बने हुए हैं.इस सीजन उनके बल्ले से एक शतक और दो अर्धशतक निकल चुके हैं.
शिखर धवन ( Shikhar Dhawan) ने वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) के बारे में कहा, ‘क्रिकेट का मैदान इस बात की परवाह नहीं करता कि आपकी उम्र क्या है. वह केवल इस बात को देखता है कि आप दबाव में कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं. वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह से अपनी बैटिंग से सबको प्रभावित किया है, वह इसी बात का प्रमाण है कि टैलेंट उम्र का मोहताज नहीं होता.
बुमराह और अर्शदीप के खिलाफ साहस
धवन ने विशेष रूप से वैभव के उस साहस की सराहना की, जो उसने दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों के खिलाफ दिखाया है. बुमराह और अर्शदीप जैसे गेंदबाज, जिन्हें खेलना बड़े-बड़े अनुभवी बल्लेबाजों के लिए भी एक परीक्षा जैसा होता है, उनके सामने एक युवा खिलाड़ी का इस कदर निडर होकर बल्लेबाजी करना वाकई हैरान करने वाला है.
शिखर धवन कहते हैं, ‘अगर वैभव सीनियर लेवल पर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो उसके खेल को तवज्जो मिलनी चाहिए, न कि उम्र को.वह अभी बच्चा है, लेकिन बड़े गेंदबाजों के खिलाफ इतने बड़े-बड़े छक्के जड़ना यह साबित करता है कि उसमें तकनीक और साहस दोनों का अद्भुत मिश्रण है.’ धवन का यह कथन उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए हौसला बढ़ाने वाला है जो अपनी उम्र के कारण खुद को सीमित महसूस करते हैं.
टॉप ऑर्डर की चुनौती
किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए टीम के टॉप ऑर्डर में जगह बनाना सबसे बड़ी चुनौती होती है. इस संदर्भ में धवन ने अपने स्वयं के करियर का उदाहरण दिया, जो किसी भी युवा क्रिकेटर के लिए एक बड़ा सबक है. उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली के साथ बिताए गए उस सुनहरे दशक को याद किया, जब उनकी तिकड़ी ने भारतीय टीम की बल्लेबाजी की रीढ़ को मजबूत किया था.धवन ने साफ तौर पर कहा, ‘अगर टॉप ऑर्डर लगातार अच्छा खेल रहा है, तो उन्हें टीम से हटाना आसान नहीं होता. जब मैं, रोहित और विराट साथ खेल रहे थे, तो हम करीब एक दशक तक एक इकाई की तरह थे. ऐसी स्थिति में बदलाव की गुंजाइश कम होती है.’ यह बात सुनने में थोड़ी कठोर लग सकती है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वास्तविकता है.
धैर्य और सही वक्त का इंतजार
धवन ने वैभव और अन्य युवाओं को एक बहुत ही महत्वपूर्ण सलाह दी है. उन्होंने कहा कि टीम में जगह न मिलना या बाहर बैठना एक खिलाड़ी के लिए चुभने वाला हो सकता है, लेकिन यह खेल का हिस्सा है. उन्होंने जोर दिया कि किसी को भी निराश नहीं होना चाहिए. बकौल धवन,’यह खिलाड़ी के मानसिक दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि वह इस स्थिति को कैसे लेता है. उनकी सलाह साफ है. अपनी मेहनत जारी रखें, क्योंकि सफलता रातों-रात नहीं मिलती. वैभव के लिए धवन के शब्द एक आशीर्वाद की तरह हैं, जो उसे यह याद दिलाते हैं कि उसका समय भी आएगा. उन्हें बस अपनी लय बनाए रखनी है और अवसरों के मिलने का धैर्यपूर्वक इंतजार करना है.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें