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आगर मालवा के खजुरी गांव में गेहूं खरीदी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. बिना बिल तुलाई और अचानक केंद्र बंद होने से किसानों के भुगतान पर सवाल खड़े हो गए हैं. प्रशासन इसे नियमों के तहत बता रहा है, लेकिन मौके की स्थिति कई गड़बड़ियों की ओर इशारा कर रही है. जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी.
आगर मालवा में गेहूं खरीदी का बड़ा मामला सामने आया है.
आगर मालवा. जिले में गेहूं खरीदी को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरा अंतर उजागर कर दिया है. सुसनेर क्षेत्र के खजुरी गांव में पैरेलल खरीदी का मामला सामने आने के बाद अब पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं. एक ओर जिला खाद्य विभाग इसे पूरी तरह नियमों के तहत बता रहा है, वहीं दूसरी ओर मौके पर मिली परिस्थितियां और किसानों की शिकायतें कई गंभीर विसंगतियों की ओर इशारा कर रही हैं. कार्यपालिक मजिस्ट्रेट अरुण चंद्रवंशी ने मौके पर जाकर स्थितियां देखीं और इसकी रिपोर्ट आगे भेज दी है. उन्होंने कहा कि सरकारी केंद्र की बजाए घर पर खरीदी हो रही थी, जिससे मिलावट की आशंका है. वहां ना तो सर्वेयर था और खरीदी के बाद किसानों के भुगतान पर भी सवाल उठ रहा है.
डीएसओ पीएल मालवीय ने कहा कि सरकारी नियम हैं कि 25 किमी के भीतर कहीं भी खरीदी हो सकती है. अगर केंद्र पर गेंहू और नहीं रखा जा सकता तो दूसरी व्यवस्था की जाती है. पैरेलल खरीदी गलत नहीं है. बात यह है कि छापामार कार्रवाई में भारी मात्रा में गेहूं, सरकारी बारदान और ट्रैक्टर मिलने के बावजूद प्रशासन इसे वैध प्रक्रिया बता रहा है. लेकिन बिना बिल के तुलाई, अचानक केंद्र बंद कर वेयरहाउस शिफ्ट करना और किसानों को स्पष्ट जानकारी न देना, इन सबने भुगतान और पारदर्शिता को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि क्या किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा या फिर वे प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझ जाएंगे.
खजुरी में पैरेलल खरीदी का खुलासा
सुसनेर क्षेत्र के खजुरी गांव में निरीक्षण के दौरान 500 से अधिक गेहूं से भरे बोरे और 250 से ज्यादा खाली बारदान मिले. साथ ही कई ट्रैक्टर भी मौके पर खड़े पाए गए. जांच में सामने आया कि जिस संस्था को सुसनेर में खरीदी की अनुमति थी, वह करीब 7 किलोमीटर दूर खजुरी में खरीदी कर रही थी.
बिना बिल तुलाई से बढ़ी चिंता
किसानों का आरोप है कि तुलाई के तुरंत बाद बिल देना अनिवार्य है, लेकिन यहां तीन दिन तक तुलाई होने के बावजूद बिल नहीं दिए गए. इससे भुगतान को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है. बिना बिल के खरीदी होने से पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं.
DSO ने बताया सब कुछ नियमों के तहत
जिला खाद्य अधिकारी पी.एल. मालवीय का कहना है कि जिले में कोई अवैध खरीदी नहीं हो रही है. उनके अनुसार गोदाम भरने के बाद समिति अपने कार्यक्षेत्र में किसी भी सुरक्षित स्थान पर खरीदी कर सकती है. 25 किलोमीटर की सीमा के भीतर यह प्रक्रिया वैध मानी जाती है. लेकिन मामला सामने आने के बाद खजुरी में तुलाई अचानक बंद कर दी गई. इसके बाद संसाधनों को वापस सुसनेर वेयरहाउस में शिफ्ट कर दिया गया. इससे यह सवाल उठ रहा है कि अगर सब कुछ नियमों के तहत था, तो यह बदलाव क्यों किया गया?
नियम और जमीन की हकीकत में फर्क,
जानकारी के अनुसार खरीदी आमतौर पर गोदाम या शासकीय परिसर में की जाती है. ऐसे में गांव के खुले स्थान पर खरीदी करना और वहां पर्याप्त सुविधाएं न होना, नियमों के पालन पर सवाल खड़े करता है. मौके पर पानी, छांव, तोल कांटे और हम्माल जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे हैं. इसके अलावा क्वालिटी जांच के लिए अधिकृत सर्वेयर की मौजूदगी भी स्पष्ट नहीं है.
भुगतान और जिम्मेदारी का सवाल
यदि खजुरी में खरीदे गए गेहूं में कोई गड़बड़ी सामने आती है या मौसम के कारण नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी स्पष्ट नहीं है. किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा या नहीं, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें