भीषण गर्मी में भगवान का भी रखा जा रहा ख्याल, मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में लगाया गया कूलर

भीषण गर्मी में भगवान का भी रखा जा रहा ख्याल, मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में लगाया गया कूलर


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देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मंदसौर में आस्था का अनोखा उदाहरण देखने को मिला है. यहां भगवान पशुपतिनाथ को गर्मी से राहत देने के लिए मंदिर के गर्भगृह में कूलर लगाया गया है

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भगवान पशुपतिनाथ

इन दिनों देश के कई हिस्सों में गर्मी का प्रकोप चरम पर है. मध्यप्रदेश का मंदसौर जिला भी इससे अछूता नहीं है. यहां तापमान 41 से 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है. ऐसे में जहां आम लोग गर्मी से बचने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं, वहीं अब भगवान को भी इस तपिश से राहत देने के प्रयास किए जा रहे हैं.मंदसौर के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में भगवान पशुपतिनाथ के लिए विशेष रूप से कूलर लगाया गया है. मंदिर के गर्भगृह में लगाए गए इस कूलर के माध्यम से भगवान को ठंडी हवा पहुंचाई जा रही है, ताकि उन्हें भी भीषण गर्मी से राहत मिल सके. यह दृश्य श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.

मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान को सजीव रूप में पूजा जाता है.ऐसे में उन्हें भी मौसम के अनुसार सुविधाएं देना जरूरी है. पुजारियों का कहना है कि जिस तरह सर्दियों में भगवान को ठंड से बचाने के लिए कंबल ओढ़ाया जाता है, उसी तरह गर्मियों में उन्हें ठंडक पहुंचाने के लिए कूलर लगाया गया है.मंदिर के पुजारी प्रीत शर्मा ने बताया कि यह व्यवस्था श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है. उनका कहना है कि भक्त अपने आराध्य को परिवार के सदस्य की तरह मानते हैं और उनकी हर जरूरत का ध्यान रखते हैं. इसी भावना के चलते यह पहल की गई है.

मंदिर में लगाया गया कूलर
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी इस व्यवस्था को देखकर भावुक हो रहे हैं. इसे भगवान के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक बता रहे हैं. कई श्रद्धालुओं का कहना है कि यह पहल दर्शाती है कि भक्त और भगवान के बीच संबंध कितना गहरा और आत्मीय होता है.गर्भगृह में लगाए गए कूलर के साथ भगवान की प्रतिमा को देखने के लिए लोगों की भीड़ भी उमड़ रही है. यह अनोखी पहल न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बन गई है.भीषण गर्मी के बीच मंदसौर के इस मंदिर में दिखाई दे रही यह आस्था एक संदेश भी देती है कि भारतीय संस्कृति में भगवान को केवल पूजनीय ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह माना जाता है, जिनकी देखभाल भी उतनी ही जरूरी समझी जाती है.



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