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Khandwa News: गर्मी से बचाव के लिए देसी फार्मूला काफी असरदार होता है. मुर्गियों के दाने में थोड़ी मात्रा में विटामिन सी मिलाकर खिलाने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है. अगर मुर्गियां हांफने लगें, तो पानी में विटामिन सी, पोटेशियम क्लोराइड और बेकिंग सोडा मिलाकर घोल तैयार कर उन्हें देना चाहिए, जिससे उन्हें फौरन राहत मिलती है.
खंडवा. भीषण गर्मी और लू के चलते जहां इंसानों का हाल बेहाल है, वहीं पशुपालकों के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. खेतों में हरा चारा सूखने लगा है, जिससे मुर्गियों और बकरियों के लिए सही पोषण जुटाना मुश्किल हो रहा है. ऐसे हालात में अगर समय रहते सही देखभाल नहीं की गई, तो पशुओं की सेहत बिगड़ सकती है और उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. खंडवा निवासी पशु विशेषज्ञ डॉ हेमंत शाह के अनुसार, गर्मियों में मुर्गियों और बकरियों को खास देखभाल की जरूरत होती है. सही आहार, ठंडा वातावरण और देसी उपाय अपनाकर उन्हें लू और हीट स्ट्रेस से बचाया जा सकता है. मुर्गियों की देखभाल के लिए सबसे जरूरी है कि उन्हें हमेशा ठंडा और साफ पानी उपलब्ध कराया जाए. उनके पीने के पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स या विटामिन सी मिलाने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और हीट स्ट्रेस कम होता है. दिन में कम से कम दो बार पानी बदलना चाहिए ताकि वह ठंडा और ताजा बना रहे.
गर्मी से बचाव के लिए देसी फार्मूला भी काफी असरदार है. मुर्गियों के दाने में थोड़ी मात्रा में विटामिन सी मिलाकर खिलाने से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. अगर मुर्गियां हांफने लगें, तो पानी में विटामिन सी, बेकिंग सोडा और पोटेशियम क्लोराइड मिलाकर घोल तैयार कर देना चाहिए, जिससे उन्हें तुरंत राहत मिलती है. मुर्गियों को ठंडक देने के लिए हरा और पानी से भरपूर आहार देना भी जरूरी है. पत्तागोभी, खीरा या अन्य हरी सब्जियां काटकर खिलाने से उनके शरीर में पानी की कमी नहीं होती और वे स्वस्थ रहती हैं. इसके साथ ही शेड की छत पर घास या पराली डालकर उस पर पानी का छिड़काव करना चाहिए, जिससे अंदर का तापमान कम बना रहता है.
शरीर को ठंडक देती ये पत्तियां
बकरियों के लिए भी गर्मियों में खास आहार और देखभाल जरूरी है. उन्हें नीम, शीशम, बबूल या खेजड़ी की पत्तियां खिलाना फायदेमंद होता है क्योंकि ये शरीर को ठंडक देती हैं. इसके अलावा अजोला जैसा पानी में उगने वाला हरा चारा बहुत उपयोगी है, जो पोषण के साथ-साथ शरीर में नमी बनाए रखता है. बकरियों के लिए देसी दाना मिश्रण भी तैयार किया जा सकता है, जिसमें जौ या मक्का का चोकर, खली, गेहूं या चावल की भूसी और दाल चुनी मिलाकर खिलाया जाता है. यह मिश्रण उन्हें ऊर्जा देता है और गर्मी से लड़ने में मदद करता है. साथ ही उन्हें छाछ या पानी में गुड़ और थोड़ा नमक मिलाकर देने से लू का खतरा कम हो जाता है.
समय का ध्यान भी जरूरी
समय का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है. दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बकरियों को चराने न ले जाएं बल्कि उन्हें छायादार और हवादार जगह पर रखें. शेड के आसपास पेड़-पौधे होने चाहिए और हवा का अच्छा इंतजाम होना चाहिए ताकि गर्मी का असर कम हो सके. साफ-सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है. गर्मियों में मक्खियां और कीड़े तेजी से बढ़ते हैं, जो बीमारियों का कारण बनते हैं, इसलिए बाड़े की नियमित सफाई करें और पशुओं को साफ-सुथरे वातावरण में रखें. अगर पशुपालक इन आसान देसी उपायों को अपनाते हैं, तो भीषण गर्मी में भी मुर्गियों और बकरियों को स्वस्थ रखा जा सकता है और नुकसान से बचा जा सकता है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.