जबलपुर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में सोमवार रात बायोमेडिकल स्टोर के बाहर कचरे के ढेर में भीषण आग लग गई। अस्पताल के पिछले हिस्से में सड़क किनारे जमा कचरे से अचानक लपटें उठीं और देखते ही देखते आग फैल गई। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां पहुंचीं। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। गनीमत रही कि आग और धुआं अस्पताल की मुख्य इमारतों तक नहीं पहुंचा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में अगर खुले में कचरा पड़ा था, तो यह बड़ी लापरवाही मानी जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग के दौरान शीशियां फूटने से पटाखों जैसी आवाज सुनाई दे रही थी। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि सामान्य कचरे के साथ बायोमेडिकल वेस्ट भी वहां पड़ा था। नियम क्या कहते हैं? बायोमेडिकल वेस्ट के लिए रंग वाले अलग-अलग बैग (पीला, लाल, सफेद, नीला) में कचरा अलग रखना जरूरी होता है। इसे अधिकृत एजेंसी के जरिए कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट भेजा जाता है, जहां मशीनों से नष्ट किया जाता है। अब सवाल यह है कि अगर सिस्टम लागू है, तो अस्पताल परिसर में कचरे का ढेर क्यों जमा था? क्या कचरा समय पर नहीं उठाया गया? संक्रमण का खतरा अस्पताल में रोज हजारों मरीज और उनके परिजन आते हैं। खुले में पड़ा संक्रमित कचरा संक्रमण फैलाने का बड़ा कारण बन सकता है। अगर मेडिकल वेस्ट सामान्य कूड़े में मिला हुआ था, तो यह सीधे तौर पर लोगों की सेहत से जुड़ा मामला है। डीन ने दिए जांच के निर्देश मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने घटना को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि देर रात आग लगने की जानकारी मिली थी। इसके बाद जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। डीन का कहना है कि जिसने भी लापरवाही की होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मेडिकल अधीक्षक को भी कहा गया है कि बायोमेडिकल कचरे का निपटान तय नियमों के अनुसार ही हो।
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