NEET UG 2026 से पहले सख्ती पर विवाद, मेडिकल छात्रों की छुट्टी रद्द, NMC ने दिया ये आदेश

NEET UG 2026 से पहले सख्ती पर विवाद, मेडिकल छात्रों की छुट्टी रद्द, NMC ने दिया ये आदेश


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भोपाल में NEET-UG 2026 परीक्षा में नकल रोकने को लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा जारी नोटिस पर विवाद खड़ा हो गया है. जहां एक ओर आयोग ने सख्ती के निर्देश दिए हैं, वहीं मध्यप्रदेश जूडा ने इसे छात्रों के प्रति अविश्वास करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई है.

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NEET UG 2026

देशभर में होने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर नकल रोकने की कवायद के बीच नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा जारी नोटिस अब विवादों में घिर गया है.इस नोटिस में मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, साथ ही 2 और 3 मई को किसी भी छात्र को अवकाश न देने की बात भी कही गई है.

यह नोटिस केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्चतर शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी के डीओ लेटर के आधार पर जारी किया गया है. इसमें परीक्षा के दौरान पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके बाद प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC) सहित सभी संस्थानों के डीन ने भी एनएमसी के निर्देशों के अनुसार आदेश जारी कर दिए हैं.

NEET-UG 2026 को लेकर NMC का सख्त
इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) ने कड़ी नाराजगी जताई है. जूडा का कहना है कि इस तरह के नोटिस से ऐसा संदेश जाता है कि मेडिकल छात्र और डॉक्टर ही संदेह के घेरे में हैं, जो पूरी तरह अनुचित है.संगठन का आरोप है कि सिस्टम और परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की जरूरत है, न कि छात्रों को ही शक की नजर से देखा जाए.जूडा ने इस नोटिस को ओवर रिएक्शन करार देते हुए कहा कि इससे मेडिकल छात्रों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि नकल रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है. जूडा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे इस तरह के नोटिस की निंदा करते हैं और इसमें सुधार की मांग करते हैं.

जूडा ने जताई नाराजगी
दूसरी ओर, प्रशासन का तर्क है कि पिछले वर्षों में सामने आए कुछ मामलों को देखते हुए परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसलिए सभी मेडिकल कॉलेजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं.फिलहाल, इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है. एक तरफ जहां पारदर्शिता और निष्पक्ष परीक्षा की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर छात्रों और डॉक्टरों को संदेह के दायरे में लाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. आने वाले दिनों में इस विवाद पर क्या समाधान निकलता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है.



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